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mahabharat 8.33.27-28h: तारकाक्ष का पराक्रमी और वीर पुत्र 'हरि' नाम से प्रसिद्ध हुआ। उसने घोर तपस्या की जिससे भगवान ब्रह्मा प्रसन्न हुए।   |   mahabharat अध्याय 8.33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  8.33.27-28h 
तारकाक्षसुतो वीरो हरिर्नाम महाबल:॥ २७॥
तपस्तेपे परमकं येनातुष्यत् पितामह:।
 
 
अनुवाद
तारकाक्ष का पराक्रमी और वीर पुत्र 'हरि' नाम से प्रसिद्ध हुआ। उसने घोर तपस्या की जिससे भगवान ब्रह्मा प्रसन्न हुए।
 
Tarakaksh's mighty and brave son was known as 'Hari'. He performed severe penance due to which Lord Brahma became pleased with him. 27 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)