Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.33.26-27h: तीनों नगरों में रहने वाला जो भी राक्षस जिस भी इच्छित सुख के बारे में सोचता, मायासुर अपने जादू से तुरंत ही उस सुख को उत्पन्न कर देता। | mahabharat अध्याय 8.33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यो हि यन्मनसा कामं दध्यौ त्रिपुरसंश्रय:॥ २६॥
तस्मै कामं मयस्तं तं विदधे मायया तदा।
अनुवाद
तीनों नगरों में रहने वाला जो भी राक्षस जिस भी इच्छित सुख के बारे में सोचता, मायासुर अपने जादू से तुरंत ही उस सुख को उत्पन्न कर देता।
Whichever demon residing in the three cities thought of any desired pleasure, Mayasura would instantly produce that pleasure through his magic. 26 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥