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mahabharat 8.33.21: राजन! उन तीनों नगरों के राजा अलग-अलग थे। वह सुवर्णमय विचित्र नगर महामना तारकाक्ष के अधीन था। 21॥   |   mahabharat अध्याय 8.33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  8.33.21 
पुरेषु चाभवन् राजन् राजानो वै पृथक् पृथक्।
काञ्चनं तारकाक्षस्य चित्रमासीन्महात्मन:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
राजन! उन तीनों नगरों के राजा अलग-अलग थे। वह सुवर्णमय विचित्र नगर महामना तारकाक्ष के अधीन था। 21॥
 
Rajan! The kings of those three cities were different. The golden strange city was under the control of Mahamana Tarakaksha. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)