श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  8.33.12 
दैत्या ऊचु:
वयं पुराणि त्रीण्येव समास्थाय महीमिमाम्।
विचरिष्याम लोकेऽस्मिंस्त्वत्प्रसादपुरस्कृता:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
दैत्यों ने कहा - हे प्रभु! हम लोग इन तीन पुरियों में रहकर आपकी कृपा से इस पृथ्वी और लोक में विचरण करेंगे॥12॥
 
The demons said - O Lord! We will stay in these three cities and roam on this earth and in this world by your grace.॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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