Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.33.11-d3: पितामह! हे देव! आप हम सबको वर प्रदान करें। हम एक सुन्दर नगररूपी विमान का निर्माण करना चाहते हैं जो हमारी इच्छानुसार चले और जिसमें हम निवास करें। हमारा नगर समस्त इच्छित वस्तुओं से युक्त तथा देवताओं और दानवों के लिए अजेय हो। हे देव! आपकी आदरपूर्वक प्रसन्नता से हमारे तीनों नगर यक्ष, राक्षस, नाग तथा नाना प्रकार के जीव-जन्तु नष्ट न करें। न जादू-टोना इन्हें नष्ट कर सके, न शस्त्र इन्हें चीर सकें, न ब्रह्मवादियों के शाप से ही ये नष्ट हों।॥11॥ | mahabharat अध्याय 8.33: दुर्योधनका शल्यसे त्रिपुरोंकी उत्पत्तिका वर्णन, त्रिपुरोंसे भयभीत इन्द्र आदि देवताओंका ब्रह्माजीके साथ भगवान् शंकरके पास जाकर उनकी स्तुति करना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अस्मभ्यं त्वं वरं देव सम्प्रयच्छ पितामह॥ ११॥
(वस्तुमिच्छाम नगरं कृत्वा कामगमं शुभम्।
सर्वकामसमृद्धार्थमवध्यं देवदानवै:॥
यक्षरक्षोरगगणैर्नानाजातिभिरेव च।
न कृत्याभिर्न शस्त्रैश्च न शापैर्ब्रह्मवादिनाम्॥
वध्येत त्रिपुरं देव प्रसन्ने त्वयि सादरम्॥
अनुवाद
पितामह! हे देव! आप हम सबको वर प्रदान करें। हम एक सुन्दर नगररूपी विमान का निर्माण करना चाहते हैं जो हमारी इच्छानुसार चले और जिसमें हम निवास करें। हमारा नगर समस्त इच्छित वस्तुओं से युक्त तथा देवताओं और दानवों के लिए अजेय हो। हे देव! आपकी आदरपूर्वक प्रसन्नता से हमारे तीनों नगर यक्ष, राक्षस, नाग तथा नाना प्रकार के जीव-जन्तु नष्ट न करें। न जादू-टोना इन्हें नष्ट कर सके, न शस्त्र इन्हें चीर सकें, न ब्रह्मवादियों के शाप से ही ये नष्ट हों।॥11॥
Grandfather! O God! Please grant us all boons. We want to build a beautiful city-shaped aircraft that moves as per our wish and reside in it. May our city be full of all the desired things and invincible for gods and demons. O God! By your respectful pleasure, our three cities should not be destroyed by Yakshas, demons, serpents and other creatures of various species. Neither witchcraft can destroy them, nor weapons can tear them apart, nor should they be destroyed by the curses of the Brahmavadis.'॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥