Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.32.47: कृषि, पशुपालन और धर्मानुसार दान देना वैश्यों के कर्तव्य हैं, तथा शूद्र ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्यों की सेवा के लिए नियुक्त हैं। | mahabharat अध्याय 8.32: दुर्योधनकी शल्यसे कर्णका सारथि बननेके लिये प्रार्थना और शल्यका इस विषयमें घोर विरोध करना, पुन: श्रीकृष्णके समान अपनी प्रशंसा सुनकर उसे स्वीकार कर लेना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कृषिश्च पाशुपाल्यं च विशां दानं च धर्मत:।
ब्रह्मक्षत्रविशां शूद्रा विहिता: परिचारका:॥ ४७॥
अनुवाद
कृषि, पशुपालन और धर्मानुसार दान देना वैश्यों के कर्तव्य हैं, तथा शूद्र ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्यों की सेवा के लिए नियुक्त हैं।
Agriculture, animal husbandry and giving charity according to the religion are the duties of the Vaishyas, and the Shudras are appointed to serve the Brahmins, Kshatriyas and Vaishyas.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥