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mahabharat 8.32.45-46: इनमें क्षत्रिय सभी की रक्षा करने वाले, सभी से कर वसूलने वाले और दान देने वाले कहे गए हैं। ब्रह्मा ने इस पृथ्वी पर ब्राह्मणों को यज्ञ करने, वेदों की शिक्षा देने और शुद्ध दान स्वीकार करने के द्वारा समस्त जगत पर अपनी कृपा बरसाने के लिए स्थापित किया है।   |   mahabharat अध्याय 8.32: दुर्योधनकी शल्यसे कर्णका सारथि बननेके लिये प्रार्थना और शल्यका इस विषयमें घोर विरोध करना, पुन: श्रीकृष्णके समान अपनी प्रशंसा सुनकर उसे स्वीकार कर लेना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 32: दुर्योधनकी शल्यसे कर्णका सारथि बननेके लिये प्रार्थना और शल्यका इस विषयमें घोर विरोध करना, पुन: श्रीकृष्णके समान अपनी प्रशंसा सुनकर उसे स्वीकार कर लेना  »  श्लोक 45-46
 
 
श्लोक  8.32.45-46 
गोप्तार: संगृहीतारो दातार: क्षत्रिया: स्मृता:॥ ४५॥
याजनाध्यापनैर्विप्रा विशुद्धैश्च प्रतिग्रहै:।
लोकस्यानुग्रहार्थाय स्थापिता ब्राह्मणा भुवि॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
इनमें क्षत्रिय सभी की रक्षा करने वाले, सभी से कर वसूलने वाले और दान देने वाले कहे गए हैं। ब्रह्मा ने इस पृथ्वी पर ब्राह्मणों को यज्ञ करने, वेदों की शिक्षा देने और शुद्ध दान स्वीकार करने के द्वारा समस्त जगत पर अपनी कृपा बरसाने के लिए स्थापित किया है।
 
Among these, the Kshatriyas are said to protect everyone, collect taxes from everyone and give donations. The Brahmins have been established by Brahma on this earth to shower their blessings on the entire world by conducting sacrifices, teaching Vedas and accepting pure donations.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)