Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.31.66-67h: हे शत्रुओं को कष्ट देने वाले राजन! मैं चाहता हूँ कि यह व्यवस्था आपके द्वारा हो। मेरी यह इच्छा पूर्ण हो। अब आपका यह समय व्यर्थ न जाए। 66 1/2। | mahabharat अध्याय 8.31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एतत् कृतं महाराज त्वयेच्छामि परंतप॥ ६६॥
क्रियतामेष कामो मे मा व: कालोऽत्यगादयम्।
अनुवाद
हे शत्रुओं को कष्ट देने वाले राजन! मैं चाहता हूँ कि यह व्यवस्था आपके द्वारा हो। मेरी यह इच्छा पूर्ण हो। अब आपका यह समय व्यर्थ न जाए। 66 1/2।
O King, who torments the enemies! I want this arrangement to be done by you. This desire of mine should be fulfilled. Now this time of yours should not be wasted. 66 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥