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mahabharat 8.31.53: यदि उसके पास अजेय दिव्य गाण्डीव धनुष है, तो मेरे पास भी विजय नामक महान दिव्य और उत्तम धनुष है।   |   mahabharat अध्याय 8.31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  8.31.53 
तस्य दिव्यं धनु: श्रेष्ठं गाण्डीवमजितं युधि।
विजयं च महद्दिव्यं ममापि धनुरुत्तमम्॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
यदि उसके पास अजेय दिव्य गाण्डीव धनुष है, तो मेरे पास भी विजय नामक महान दिव्य और उत्तम धनुष है।
 
If he has the invincible, divine bow Gandiva, then I too have a great, divine and excellent bow called Vijaya. 53.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)