श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  8.31.5 
न ते निन्द्या: प्रशस्यास्ते यत्ते चक्रुर्ब्रवीहि तत्।
ततो दुर्योधन: सूत पश्चात् किमकरोत् तदा॥ ५॥
 
 
अनुवाद
अतः हमारे पक्ष के वे सैनिक या राजा निन्दनीय नहीं, स्तुति के पात्र हैं। उन्होंने जो कुछ किया है, वह हमें बताओ। सूत! सेना के शिविर में लौट आने पर उस समय दुर्योधन ने क्या किया?॥5॥
 
Therefore, those soldiers or kings of our side are not condemnable, they are worthy of praise. Tell us whatever they have done. Suta! What did Duryodhan do at that time after the army returned to the camp?॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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