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mahabharat 8.31.36: भरतवंशी राजा! मेरे और अर्जुन के सामने बहुत से कार्य आ गए; इसीलिए अब तक मेरे और उनके बीच द्वन्द्वयुद्ध नहीं हो सका॥36॥   |   mahabharat अध्याय 8.31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  8.31.36 
बहुत्वान्मम कार्याणां तथा पार्थस्य भारत।
नाभूत् समागमो राजन् मम चैवार्जुनस्य च॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
भरतवंशी राजा! मेरे और अर्जुन के सामने बहुत से कार्य आ गए; इसीलिए अब तक मेरे और उनके बीच द्वन्द्वयुद्ध नहीं हो सका॥36॥
 
Bharatvanshi king! Many tasks came before me and Arjun; That is why till now there could not be a dual war between me and them. 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)