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mahabharat 8.31.17-18: संजय! सेना के शिविर में वापस भेज दिए जाने पर, जब रात्रि बीत गई और प्रातःकाल पुनः युद्ध आरम्भ हुआ, तब वैकर्तन कर्ण ने वहाँ किस प्रकार युद्ध किया और समस्त पाण्डवों ने सूतपुत्र कर्ण के साथ किस प्रकार युद्ध आरम्भ किया?॥17-18॥   |   mahabharat अध्याय 8.31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 31: रात्रिमें कौरवोंकी मन्त्रणा, धृतराष्ट्रके द्वारा दैवकी प्रबलताका प्रतिपादन, संजयद्वारा धृतराष्ट्रपर दोषारोप तथा कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  8.31.17-18 
कृतेऽवहारे सैन्यानां प्रवृत्ते च रणे पुन:॥ १७॥
कथं वैकर्तन: कर्णस्तत्रायुध्यत संजय।
कथं च पाण्डवा: सर्वे युयुधुस्तत्र सूतजम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
संजय! सेना के शिविर में वापस भेज दिए जाने पर, जब रात्रि बीत गई और प्रातःकाल पुनः युद्ध आरम्भ हुआ, तब वैकर्तन कर्ण ने वहाँ किस प्रकार युद्ध किया और समस्त पाण्डवों ने सूतपुत्र कर्ण के साथ किस प्रकार युद्ध आरम्भ किया?॥17-18॥
 
Sanjaya! After the army was sent back to the camp, when the night passed and the battle began again in the morning, how did Vaikartana Karna fight there and how did all the Pandavas begin the battle with Sutaputra Karna?॥17-18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)