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mahabharat 8.28.30: हे प्रजानाथ! हाथियों के आगे चलने वाले पैदल सैनिक युद्धस्थल में इधर-उधर दूसरे पक्ष के हाथियों के शरीरों पर भयंकर चोट पहुँचाते थे।   |   mahabharat अध्याय 8.28: युधिष्ठिर और दुर्योधनका युद्ध, दुर्योधनकी पराजय तथा उभयपक्षकी सेनाओंका अमर्यादित भयंकर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 28: युधिष्ठिर और दुर्योधनका युद्ध, दुर्योधनकी पराजय तथा उभयपक्षकी सेनाओंका अमर्यादित भयंकर संग्राम  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  8.28.30 
पुर:सराश्च नागानामपरेषां विशाम्पते।
शरीराण्यतिविद्धानि तत्र तत्र रणाजिरे॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
हे प्रजानाथ! हाथियों के आगे चलने वाले पैदल सैनिक युद्धस्थल में इधर-उधर दूसरे पक्ष के हाथियों के शरीरों पर भयंकर चोट पहुँचाते थे।
 
O Prajanath! The foot soldiers walking ahead of the elephants would inflict severe injuries on the bodies of the elephants of the other side here and there on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)