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mahabharat 8.28.15: वे वीर योद्धा की प्रतिज्ञा का पालन करते हुए युद्धभूमि में एक-दूसरे का संहार करते थे। युद्ध में वे कभी पीठ नहीं दिखाते थे॥15॥   |   mahabharat अध्याय 8.28: युधिष्ठिर और दुर्योधनका युद्ध, दुर्योधनकी पराजय तथा उभयपक्षकी सेनाओंका अमर्यादित भयंकर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 28: युधिष्ठिर और दुर्योधनका युद्ध, दुर्योधनकी पराजय तथा उभयपक्षकी सेनाओंका अमर्यादित भयंकर संग्राम  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  8.28.15 
अन्योन्यं समरे जघ्नुर्योधव्रतमनुष्ठिता:।
न हि ते समरं चक्रु: पृष्ठतो वै कथञ्चन॥ १५॥
 
 
अनुवाद
वे वीर योद्धा की प्रतिज्ञा का पालन करते हुए युद्धभूमि में एक-दूसरे का संहार करते थे। युद्ध में वे कभी पीठ नहीं दिखाते थे॥15॥
 
They followed the vow of a valiant warrior and killed each other on the battlefield. They never turned their backs in battle.॥15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)