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mahabharat 8.28.13: महाराज! उस युद्धस्थल में जो नाना प्रकार के अकल्पनीय, शस्त्रयुक्त और उत्तम द्वन्द्वयुद्ध हो रहे थे, वे देखने योग्य थे॥13॥   |   mahabharat अध्याय 8.28: युधिष्ठिर और दुर्योधनका युद्ध, दुर्योधनकी पराजय तथा उभयपक्षकी सेनाओंका अमर्यादित भयंकर संग्राम   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 28: युधिष्ठिर और दुर्योधनका युद्ध, दुर्योधनकी पराजय तथा उभयपक्षकी सेनाओंका अमर्यादित भयंकर संग्राम  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  8.28.13 
द्वन्द्वान्यासन् महाराज प्रेक्षणीयानि संयुगे।
विविधान्यप्यचिन्त्यानि शस्त्रवन्त्युत्तमानि च॥ १३॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उस युद्धस्थल में जो नाना प्रकार के अकल्पनीय, शस्त्रयुक्त और उत्तम द्वन्द्वयुद्ध हो रहे थे, वे देखने योग्य थे॥13॥
 
Maharaj! The various types of unimaginable, well-armed and excellent duels taking place in that battlefield were worth seeing. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)