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mahabharat 8.27.6: लेकिन जिस प्रकार गरुड़ को देखकर सर्प अपने प्राण त्याग देते हैं, उसी प्रकार वे सभी लाखों योद्धा अर्जुन के पास पहुँचकर मर गए।   |   mahabharat अध्याय 8.27: अर्जुनद्वारा राजा श्रुतंजय, सौश्रुति, चन्द्रदेव और सत्यसेन आदि महारथियोंका वध एवं संशप्तक-सेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 27: अर्जुनद्वारा राजा श्रुतंजय, सौश्रुति, चन्द्रदेव और सत्यसेन आदि महारथियोंका वध एवं संशप्तक-सेनाका संहार  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  8.27.6 
ते त्वर्जुनं समासाद्य योधा: शतसहस्रश:।
अगच्छन् विलयं सर्वे तार्क्ष्यं दृष्ट्वेव पन्नगा:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
लेकिन जिस प्रकार गरुड़ को देखकर सर्प अपने प्राण त्याग देते हैं, उसी प्रकार वे सभी लाखों योद्धा अर्जुन के पास पहुँचकर मर गए।
 
But just as snakes lose their lives upon seeing Garuda, similarly all those lakhs of warriors died upon reaching Arjuna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)