श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 27: अर्जुनद्वारा राजा श्रुतंजय, सौश्रुति, चन्द्रदेव और सत्यसेन आदि महारथियोंका वध एवं संशप्तक-सेनाका संहार  »  श्लोक 40-41h
 
 
श्लोक  8.27.40-41h 
सीदमानानि चक्राणि समूहुस्तुरगा भृशम्॥ ४०॥
श्रमेण महता युक्ता मनोमारुतरंहस:।
 
 
अनुवाद
मन और वायु के समान वेगवान घोड़े भी फंसे हुए पहियों को बड़ी कठिनाई से खींच सकते हैं।
 
Even horses as swift as the mind and the wind could pull the stuck wheels with great difficulty. 40 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)