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mahabharat 8.27.23: माननीय महोदय, सत्यसेन को मारकर उसने मित्रवर्मा को तीक्ष्ण बाणों से तथा उसके सारथि को भी तीक्ष्ण वत्सदंत से मार डाला।   |   mahabharat अध्याय 8.27: अर्जुनद्वारा राजा श्रुतंजय, सौश्रुति, चन्द्रदेव और सत्यसेन आदि महारथियोंका वध एवं संशप्तक-सेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 27: अर्जुनद्वारा राजा श्रुतंजय, सौश्रुति, चन्द्रदेव और सत्यसेन आदि महारथियोंका वध एवं संशप्तक-सेनाका संहार  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  8.27.23 
तन्निकृत्य शितैर्बाणैर्मित्रवर्माणमाक्षिपत्।
वत्सदन्तेन तीक्ष्णेन सारथिं चास्य मारिष॥ २३॥
 
 
अनुवाद
माननीय महोदय, सत्यसेन को मारकर उसने मित्रवर्मा को तीक्ष्ण बाणों से तथा उसके सारथि को भी तीक्ष्ण वत्सदंत से मार डाला।
 
Honorable Sir, after killing Satyasen, he killed Mitravarma with sharp arrows and also his charioteer with a sharp Vatsadent.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)