श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 27: अर्जुनद्वारा राजा श्रुतंजय, सौश्रुति, चन्द्रदेव और सत्यसेन आदि महारथियोंका वध एवं संशप्तक-सेनाका संहार  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  8.27.20 
प्रतोदं गृह्य सोऽन्यत्तु रश्मीनपि यथा पुरा।
वाहयामास तानश्वान् सत्यसेनरथं प्रति॥ २०॥
 
 
अनुवाद
तब भगवान श्रीकृष्ण ने दूसरा चाबुक लिया और घोड़ों की लगाम पहले की तरह थाम ली और उन्हें सत्यसेन के रथ के पास ले आए।
 
Then Lord Krishna took another whip and controlled the reins of the horses as before and brought them near Satyasena's chariot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)