श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 27: अर्जुनद्वारा राजा श्रुतंजय, सौश्रुति, चन्द्रदेव और सत्यसेन आदि महारथियोंका वध एवं संशप्तक-सेनाका संहार  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  8.27.1 
संजय उवाच
श्वेताश्वोऽथ महाराज व्यधमत्तावकं बलम्।
यथा वायु: समासाद्य तूलराशिं समन्तत:॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा: 'महाराज! एक ओर श्वेत घोड़े पर सवार अर्जुन आपकी सेना का उसी प्रकार संहार कर रहा था, जैसे वायु रूई के ढेर को ढूँढ़कर उसे चारों ओर बिखेर देती है।' ॥1॥
 
Sanjaya said: 'Maharaj, on one side Arjuna riding on a white horse was destroying your army in the same manner as the wind finds a heap of cotton and scatters it all around.' ॥1॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas