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mahabharat 8.26.35-36h: तत्पश्चात् आक्रमणकारी योद्धाओं में श्रेष्ठ कृतवर्मा ने युद्धस्थल में अत्यन्त शीघ्रता से उस पर एक भयंकर, घातक बाण चलाया।   |   mahabharat अध्याय 8.26: कृपाचार्यसे धृष्टद्युम्नका भय तथा कृतवर्माके द्वारा शिखण्डीकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 26: कृपाचार्यसे धृष्टद्युम्नका भय तथा कृतवर्माके द्वारा शिखण्डीकी पराजय  »  श्लोक 35-36h
 
 
श्लोक  8.26.35-36h 
ततोऽस्य समरे बाणं भोज: प्रहरतां वर:॥ ३५॥
जीवितान्तकरं घोरं व्यसृजत्त्वरयान्वित:।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् आक्रमणकारी योद्धाओं में श्रेष्ठ कृतवर्मा ने युद्धस्थल में अत्यन्त शीघ्रता से उस पर एक भयंकर, घातक बाण चलाया।
 
Thereafter, Kritavarman, the best among the attacking warriors, very hastily shot a terrible, fatal arrow at him in the battlefield. 35 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)