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mahabharat 8.25.6: तब उलूकेन ने युद्धस्थल में क्रोधित होकर स्वर्णवस्त्रधारी युयुत्सुको को बीस बाणों से घायल कर दिया और उसकी स्वर्णध्वजा भी काट डाली ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 8.25: युयुत्सु और उलूकका युद्ध, युयुत्सुका पलायन, शतानीक और धृतराष्ट्रपुत्र श्रुतकर्माका तथा सुतसोम और शकुनिका घोर युद्ध एवं शकुनिद्वारा पाण्डव-सेनाका विनाश   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 25: युयुत्सु और उलूकका युद्ध, युयुत्सुका पलायन, शतानीक और धृतराष्ट्रपुत्र श्रुतकर्माका तथा सुतसोम और शकुनिका घोर युद्ध एवं शकुनिद्वारा पाण्डव-सेनाका विनाश  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  8.25.6 
उलूकस्तं तु विंशत्या विद्‍ध्वा स्वर्णविभूषितै:।
अथास्य समरे क्रुद्धो ध्वजं चिच्छेद काञ्चनम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
तब उलूकेन ने युद्धस्थल में क्रोधित होकर स्वर्णवस्त्रधारी युयुत्सुको को बीस बाणों से घायल कर दिया और उसकी स्वर्णध्वजा भी काट डाली ॥6॥
 
Then Ulukane became enraged in the battlefield and wounded the golden-clad Yuyutsuko with twenty arrows and also cut off his golden flag. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)