श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 23: सहदेवके द्वारा दु:शासनकी पराजय  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  8.23.17 
तत: क्रुद्धो महाराज सहदेव: प्रतापवान्।
समाधत्त शरं घोरं मृत्युकालान्तकोपमम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! इससे क्रोधित होकर महाबली सहदेव ने अपने धनुष पर एक ऐसा बाण चढ़ाया जो मृत्यु, काल और यमराज के समान भयंकर था।
 
Maharaj! Enraged by this, the mighty Sahadeva placed an arrow on his bow which was as dreadful as death, time and Yamaraja.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)