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mahabharat 8.22.14: उधर पुण्ड्रराज आक्रमण कर रहा था। उसका हाथी हिलते हुए पर्वत के समान दिखाई दे रहा था। सहदेव ने बड़े प्रयत्न से तीन बाण चलाकर उसे घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.22: पाण्डव-सेनापर भयानक गजसेनाका आक्रमण, पाण्डवोंद्वारा पुण्ड्रकी पराजय तथा बंगराज और अंगराजका वध, गजसेनाका विनाश और पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 22: पाण्डव-सेनापर भयानक गजसेनाका आक्रमण, पाण्डवोंद्वारा पुण्ड्रकी पराजय तथा बंगराज और अंगराजका वध, गजसेनाका विनाश और पलायन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  8.22.14 
पुण्ड्रस्यापततो नागं चलन्तमिव पर्वतम्।
सहदेव: प्रयत्नास्तैर्नाराचैरहनत् त्रिभि:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
उधर पुण्ड्रराज आक्रमण कर रहा था। उसका हाथी हिलते हुए पर्वत के समान दिखाई दे रहा था। सहदेव ने बड़े प्रयत्न से तीन बाण चलाकर उसे घायल कर दिया।
 
On the other side, Pundraraj was attacking. His elephant looked like a moving mountain. Sahadeva injured it with three arrows fired with great effort.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)