श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 21: कौरव-पाण्डव-दलोंका भयंकर घमासान युद्ध  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  8.21.6-7 
सर्वमाख्यातवान् वीरो वासुदेव: किरीटिने॥ ६॥
एतच्छ्रुत्वा च दृष्ट्वा च भ्रातुर्घोरं महद्भयम्।
वाहयाश्वान् हृषीकेश क्षिप्रमित्याह पाण्डव:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
वीर वसुदेवनन्दन श्रीकृष्ण ने किरीटधारी अर्जुन से ये सब बातें कहीं। यह सुनकर और अपने भाई पर आये इस अत्यन्त महान भय को देखकर पाण्डुकुमार अर्जुन ने कहा - 'हृषीकेश! आप शीघ्र ही इन घोड़ों को आगे बढ़ाएँ।'
 
Brave Vasudevanandan Shri Krishna told all these things to the crowned Arjuna. Hearing this and seeing this extreme and great fear that had come upon his brother, Pandukumar Arjun said - 'Hrishikesh! You should raise these horses soon. 6-7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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