श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 21: कौरव-पाण्डव-दलोंका भयंकर घमासान युद्ध  »  श्लोक 5-6h
 
 
श्लोक  8.21.5-6h 
निवृत्तैश्च पुन: पार्थैर्भग्नं शत्रुबलं महत्।
अश्वत्थाम्नश्च सङ्कल्पाद्धता: कर्णेन सृञ्जया:॥ ५॥
तथाश्वरथनागानां कृतं च कदनं महत्।
 
 
अनुवाद
पुनः लौटे हुए पाण्डव योद्धाओं ने विशाल शत्रु सेना को परास्त कर दिया; किन्तु अश्वत्थामा की इच्छानुसार कर्ण ने समस्त योद्धाओं को मार डाला तथा उसकी सेना के हाथी, घोड़े और रथों का महान संहार किया।॥5 1/2॥
 
‘The Pandava warriors who returned again put the huge enemy army to rout; but as per Ashvatthama's wish, Karna killed all the warriors and caused great destruction to the elephants, horses and chariots of his army.'॥ 5 1/2॥
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