| श्री महाभारत » पर्व 8: कर्ण पर्व » अध्याय 21: कौरव-पाण्डव-दलोंका भयंकर घमासान युद्ध » श्लोक 15 |
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| | | | श्लोक 8.21.15  | ज्यातलत्रधनु:शब्द: कुञ्जराणां च बृंहताम्।
पादातानां च पततां नृणां नादो महानभूत्॥ १५॥ | | | | | | अनुवाद | | धनुष-बाण की ध्वनि, हाथियों की चिंघाड़ और रणभूमि में गिरते हुए पैदलों का महान् आर्तनाद वहाँ गूंजने लगा ॥15॥ | | | | The sound of bow and arrow, the sound of trumpeting elephants and the great cry of footmen falling on the battlefield started echoing there. 15॥ | | ✨ ai-generated | | |
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