Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.2.26: धृतराष्ट्र बोले, "संजय! मैं इससे दुःखी नहीं होऊँगा। मैं तो पहले ही मान चुका हूँ कि यह ईश्वर का अवश्यंभावी विधान है। अतः तुम अपनी इच्छानुसार मुझे सम्पूर्ण वृत्तांत सुना सकते हो।" | mahabharat अध्याय 8.2: धृतराष्ट्र और संजयका संवाद । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धृतराष्ट्र उवाच
न व्यथाभ्यधिका काचिद् विद्यते मम संजय।
दिष्टमेतत् पुरा मन्ये कथयस्व यथेच्छकम्॥ २६॥
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले, "संजय! मैं इससे दुःखी नहीं होऊँगा। मैं तो पहले ही मान चुका हूँ कि यह ईश्वर का अवश्यंभावी विधान है। अतः तुम अपनी इच्छानुसार मुझे सम्पूर्ण वृत्तांत सुना सकते हो।"
Dhritarashtra said, "Sanjay! I will not be saddened by this. I have already believed that this is an inevitable decree of God. Therefore, you may tell me the whole story as per your wish."
इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि धृतराष्ट्रसंजयसंवादे द्वितीयोऽध्याय:॥ २॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें धृतराष्ट्र-संजयसंवादविषयक दूसरा अध्याय पूरा हुआ॥ २॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥