Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.2.25: प्रारब्धवश मनुष्य को इच्छित वस्तु मिल भी सकती है और नहीं भी। अतः वस्तु मिले या न मिले, बुद्धिमान पुरुष किसी भी अवस्था में (सुख या) दुःख का अनुभव नहीं करता॥ 25॥ | mahabharat अध्याय 8.2: धृतराष्ट्र और संजयका संवाद । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यस्मादभावी भावी वा भवेदर्थो नरं प्रति।
अप्राप्तौ तस्य वा प्राप्तौ न कश्चिद् व्यथते बुध:॥ २५॥
अनुवाद
प्रारब्धवश मनुष्य को इच्छित वस्तु मिल भी सकती है और नहीं भी। अतः वस्तु मिले या न मिले, बुद्धिमान पुरुष किसी भी अवस्था में (सुख या) दुःख का अनुभव नहीं करता॥ 25॥
Due to destiny, a man may or may not get the desired object. Therefore, whether he gets the object or not, a wise man does not experience any (happiness or) pain in any condition.॥ 25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥