Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.19.47-48h: हाथियों के स्वर्णिम कम्बल घुड़सवारों की पताकाओं के अग्रभाग में उलझे हुए हैं। घोड़ों की पीठों पर बिछे हुए मृगचर्म के बने जीन और जीनों को देखो, जो रत्नजटित और स्वर्ण से अलंकृत होकर भूमि पर पड़े हैं।   |   mahabharat अध्याय 8.19: अर्जुनके द्वारा संशप्तक-सेनाका संहार, श्रीकृष्णका अर्जुनको युद्धस्थलका दृश्य दिखाते हुए उनके पराक्रमकी प्रशंसा करना तथा पाण्ड्यनरेशका कौरव-सेनाके साथ युद्धारम्भ   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 19: अर्जुनके द्वारा संशप्तक-सेनाका संहार, श्रीकृष्णका अर्जुनको युद्धस्थलका दृश्य दिखाते हुए उनके पराक्रमकी प्रशंसा करना तथा पाण्ड्यनरेशका कौरव-सेनाके साथ युद्धारम्भ  »  श्लोक 47-48h
 
 
श्लोक  8.19.47-48h 
विद्धा: सादिध्वजाग्रेषु सुवर्णविकृता: कुथा:।
विचित्रान् मणिचित्रांश्च जातरूपपरिष्कृतान्॥ ४७॥
अश्वास्तरपरिस्तोमान् राङ्कवान् पतितान् भुवि।
 
 
अनुवाद
हाथियों के स्वर्णिम कम्बल घुड़सवारों की पताकाओं के अग्रभाग में उलझे हुए हैं। घोड़ों की पीठों पर बिछे हुए मृगचर्म के बने जीन और जीनों को देखो, जो रत्नजटित और स्वर्ण से अलंकृत होकर भूमि पर पड़े हैं।
 
‘The golden blankets of the elephants are entangled in the front of the banners of the horsemen. Look at the saddles and saddles made of the skin of the deer, which are spread on the backs of the horses, studded with jewels and decorated with gold, lying on the ground.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)