न चेदरक्षिष्य इमं जनं भयाद्
द्विषद्भिरेवं बलिभि: प्रपीडितम्।
तथा भविष्यद् विषतां प्रमोदनं
यथा हतेष्वेष्विह नोऽरिसूदन॥ २४॥
अनुवाद
शत्रुसूदन! यदि आपने इन बलवान शत्रुओं के हाथों इस प्रकार कष्ट सह रहे इन स्वजनों को भय से न बचाया होता, तो इन शत्रुओं को भी वैसा ही सुख होता जैसा हम इस समय उनके मरकर यहाँ अनुभव कर रहे हैं॥ 24॥
Shatrusudan! If you had not protected these relatives from fear who were suffering in this manner at the hands of the powerful enemies, then these enemies would have felt as happy as we are feeling here at this moment after their death.'॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥