श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 18: अर्जुनके द्वारा हाथियोंसहित दण्डधार और दण्ड आदिका वध तथा उनकी सेनाका पलायन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  8.18.23 
अथार्जुनं स्वे परिवार्य सैनिका:
पुरन्दरं देवगणा इवाब्रुवन्।
अभैष्म यस्मान्मरणादिव प्रजा:
स वीर दिष्टॺा निहतस्त्वया रिपु:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, जैसे देवताओं ने इन्द्र को घेर लिया था, वैसे ही उसकी अपनी सेना के लोगों ने अर्जुन को घेर लिया और उससे कहा - 'वीर! जैसे लोग मृत्यु से डरते हैं, वैसे ही तुमने उस शत्रु को मार डाला जिससे हम लोग डरते थे; यह बड़े सौभाग्य की बात है!॥ 23॥
 
After this, the people of his own army surrounded Arjuna like the gods who surrounded Indra and said to him - 'Valiant! Just as the people are afraid of death, in the same way you have killed the enemy from whom we were scared; this is a matter of great fortune!॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)