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mahabharat 8.17.18: तब अश्वत्थामा ने शीघ्रता से अपने धनुष पर दस उत्तम बाण चढ़ाकर एक साथ उन पर प्रहार किया। उनमें से पाँच सुंदर पंख वाले बाणों ने अर्जुन को और पाँच ने श्रीकृष्ण को घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.17: अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 17: अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाकी पराजय  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  8.17.18 
संधाय नाराचवरान् दशाशु
द्रौणिस्त्वरन्नेकमिवोत्ससर्ज।
तेषां च पञ्चार्जुनमभ्यविध्यन्
पञ्चाच्युतं निर्बिभिदु: सुपुङ्खा:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
तब अश्वत्थामा ने शीघ्रता से अपने धनुष पर दस उत्तम बाण चढ़ाकर एक साथ उन पर प्रहार किया। उनमें से पाँच सुंदर पंख वाले बाणों ने अर्जुन को और पाँच ने श्रीकृष्ण को घायल कर दिया।
 
Then Ashvatthama very hastily placed ten excellent arrows on his bow and shot them all together as one. Five of the beautiful winged arrows pierced Arjuna and five injured Shri Krishna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)