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mahabharat 8.16.d13-d14: श्री भगवान बोले - पार्थ! भरतनन्दन! इस युद्ध में मैं तुममें एक बड़ा ही अद्भुत परिवर्तन देख रहा हूँ कि आज द्रोणकुमार युद्धभूमि में तुमसे आगे चल रहे हैं। क्या तुम्हारे हाथ में गाण्डीव धनुष है? या तुम्हारी मुट्ठी ढीली हो गई है? क्या तुम्हारी दोनों भुजाओं में पहले जैसा बल और पराक्रम है? क्योंकि इस समय मैं द्रोणकुमार को युद्ध में तुमसे आगे बढ़ते हुए देख रहा हूँ।   |   mahabharat अध्याय 8.16: अर्जुनका संशप्तकों तथा अश्वत्थामाके साथ अद्भुत युद्ध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 16: अर्जुनका संशप्तकों तथा अश्वत्थामाके साथ अद्भुत युद्ध  »  श्लोक d13-d14
 
 
श्लोक  8.16.d13-d14 
श्रीभगवानुवाच
अत्यद्भुतमहं पार्थ त्वयि पश्यामि संयुगे।
यत् त्वां विशेषयत्याजौ द्रोणपुत्रोऽद्य भारत॥
कच्चित्ते गाण्डिवं हस्ते मुष्टिर्वा न व्यशीर्यत।
कच्चिद् वीर्यं यथापूर्वं भुजयोर्वा बलं तव॥
उदीर्यमाणं हि रणे पश्यामि द्रौणिमाहवे।
 
 
अनुवाद
श्री भगवान बोले - पार्थ! भरतनन्दन! इस युद्ध में मैं तुममें एक बड़ा ही अद्भुत परिवर्तन देख रहा हूँ कि आज द्रोणकुमार युद्धभूमि में तुमसे आगे चल रहे हैं। क्या तुम्हारे हाथ में गाण्डीव धनुष है? या तुम्हारी मुट्ठी ढीली हो गई है? क्या तुम्हारी दोनों भुजाओं में पहले जैसा बल और पराक्रम है? क्योंकि इस समय मैं द्रोणकुमार को युद्ध में तुमसे आगे बढ़ते हुए देख रहा हूँ।
 
Shri Bhagwan said - Parth! Bharatanandan! I am seeing a very amazing change in you in this war that today Dronakumar is going ahead of you in the battlefield. Do you have the Gandiva bow in your hand? Or has your fist become loose? Do both your arms have the same strength and valour as before? Because at this time I am seeing Dronakumar surpassing you in the battle.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)