तब पाण्डुपुत्र अर्जुन संशप्तकों को छोड़कर द्रोणपुत्र अश्वत्थामा के सामने आये, जैसे कोई दान देने वाला पंक्ति में बैठने के अयोग्य ब्राह्मणों को छोड़कर याचना करने वाले ब्राह्मण के पास जाता है ॥ 51॥
Then Arjuna, son of Pandu, leaving behind the Samshaptakas, came before Ashwatthama, son of Drona, just as a donor leaves behind the Brahmins who are unworthy of sitting in the line and goes towards the Brahmin who is pleading. ॥ 51॥
इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि अश्वत्थामार्जुनसंवादे षोडशोऽध्याय:॥ १६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें अश्वत्थामा और अर्जुनका संवादविषयक सोलहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १६॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके १५ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ६६ १/२ श्लोक हैं।)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥