श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 16: अर्जुनका संशप्तकों तथा अश्वत्थामाके साथ अद्भुत युद्ध  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  8.16.44 
पश्चात्तु शैलवत् पेतुस्ते गजा: सह सादिभि:।
वज्रिवज्रप्रमथिता यथैवाद्रिचयास्तथा॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
सूँड कट जाने पर वे पर्वतरूपी हाथी अपने सवारों सहित उसी प्रकार गिर पड़ते थे, जैसे वज्रधारी इन्द्र के वज्र से छेदे जाने पर पर्वतों के ढेर गिर पड़ते हैं ॥ 44॥
 
After their trunks were cut off, those mountain-like elephants, along with their riders, would fall down like heaps of mountains that had fallen after being pierced by the thunderbolt of the thunderbolt-bearing Indra. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)