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mahabharat 8.16.41: उस समय जो भी मनुष्य वहाँ जिस किसी रूप में दिखाई देते थे, वे स्वयं अपने को बाणों से बिंधा हुआ समझने लगते थे ॥41॥   |   mahabharat अध्याय 8.16: अर्जुनका संशप्तकों तथा अश्वत्थामाके साथ अद्भुत युद्ध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 16: अर्जुनका संशप्तकों तथा अश्वत्थामाके साथ अद्भुत युद्ध  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  8.16.41 
ये ये ददृशिरे तत्र यद्यद्रूपास्तदा जना:।
ते ते तत्र शरैर्व्याप्तं मेनिरेऽऽत्मानमात्मना॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
उस समय जो भी मनुष्य वहाँ जिस किसी रूप में दिखाई देते थे, वे स्वयं अपने को बाणों से बिंधा हुआ समझने लगते थे ॥41॥
 
At that time whatever human beings were seen there in whatever form, they themselves began to consider themselves pierced by arrows. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)