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श्री महाभारत
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पर्व 8: कर्ण पर्व
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अध्याय 16: अर्जुनका संशप्तकों तथा अश्वत्थामाके साथ अद्भुत युद्ध
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श्लोक 38
श्लोक
8.16.38
वधं प्राप्तौ मन्यते नौ प्रावेश्य शरवेश्मनि।
एषोऽस्मि हन्मि संकल्पं शिक्षया च बलेन च॥ ३८॥
अनुवाद
वह सोचता है कि अपने बाणों से हमें घेरकर हम दोनों मर गए हैं। अब मैं अपने ज्ञान और बल से उसके इस इरादे को नष्ट कर दूँगा। ॥38॥
"He thinks that by encircling us with his arrows, we are both dead. I will now destroy this intention of his with my knowledge and strength." ॥ 38॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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