Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.16.34-35: माननीय महोदय! उस समय वैदिक विद्वान अश्वत्थामा के तरकश, धनुष, प्रत्यंचा, भुजाओं, हाथों, वक्षस्थल, मुख, नाक, नेत्र, कान, मस्तक, शरीर के विभिन्न अंगों, केशों, कवच, रथ और ध्वजाओं से बाण निकल रहे थे। | mahabharat अध्याय 8.16: अर्जुनका संशप्तकों तथा अश्वत्थामाके साथ अद्भुत युद्ध । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
माननीय महोदय! उस समय वैदिक विद्वान अश्वत्थामा के तरकश, धनुष, प्रत्यंचा, भुजाओं, हाथों, वक्षस्थल, मुख, नाक, नेत्र, कान, मस्तक, शरीर के विभिन्न अंगों, केशों, कवच, रथ और ध्वजाओं से बाण निकल रहे थे।
Honorable Sir! At that time arrows were coming out from the quiver, bow, bowstring, arms, hands, chest, mouth, nose, eyes, ears, head, different body parts, hair, armor, chariot and flags of the Vedic scholar Ashwatthama.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥