श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 16: अर्जुनका संशप्तकों तथा अश्वत्थामाके साथ अद्भुत युद्ध  »  श्लोक 24-25
 
 
श्लोक  8.16.24-25 
संशप्तकाश्च मे वध्या द्रौणिराह्वयते च माम्॥ २४॥
यदत्रानन्तरं प्राप्तं शंस मे तद्धि माधव।
आतिथ्यकर्माभ्युत्थाय दीयतां यदि मन्यसे॥ २५॥
 
 
अनुवाद
माधव! एक ओर तो मुझे संशपताकों का वध करना है, दूसरी ओर द्रोणपुत्र अश्वत्थामा मुझे युद्ध के लिए बुला रहा है। अतः मुझे यहाँ पहला कर्तव्य बताइए जो मुझे करना चाहिए। यदि आप उचित समझें तो अश्वत्थामा को पहले उठकर आतिथ्य स्वीकार करने का अवसर दिया जाना चाहिए।'॥24-25॥
 
‘Madhava! On one hand I have to kill Samshpatakas, on the other hand Drona's son Ashwatthama is calling me for war. So tell me the first duty that I should perform here. If you think it is right then Ashwatthama should get up first and be given the opportunity to accept the hospitality.'॥ 24-25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)