श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 15: अश्वत्थामा और भीमसेनका अद्भुत युद्ध तथा दोनोंका मूर्च्छित हो जाना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  8.15.42 
तौ परस्परवेगाच्च शराभ्यां च भृशाहतौ।
निपेततुर्महावीर्यौ रथोपस्थे तयोस्तदा॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
वे महाबली योद्धा परस्पर वेग से छोड़े हुए बाणों से घायल होकर अपने-अपने रथों के आसनों पर तुरन्त गिर पड़े ॥42॥
 
Those mighty warriors, wounded by the arrows shot with mutual force, fell down instantly in the seats of their chariots. ॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)