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mahabharat 8.13.33-34h: सात्यकि की सैकड़ों नक्षत्र-चिह्नों से भरी ढाल को काटकर उसने विन्दगत और प्रत्यगत जैसी अपनी चालें बदलनी आरम्भ कर दीं।   |   mahabharat अध्याय 8.13: दोनों सेनाओंका परस्पर घोर युद्ध तथा सात्यकिके द्वारा विन्द और अनुविन्दका वध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 13: दोनों सेनाओंका परस्पर घोर युद्ध तथा सात्यकिके द्वारा विन्द और अनुविन्दका वध  »  श्लोक 33-34h
 
 
श्लोक  8.13.33-34h 
चर्म च्छित्त्वा तु कैकेयस्तारागणशतैर्वृतम्॥ ३३॥
चचार मण्डलान्येव गतप्रत्यागतानि च।
 
 
अनुवाद
सात्यकि की सैकड़ों नक्षत्र-चिह्नों से भरी ढाल को काटकर उसने विन्दगत और प्रत्यगत जैसी अपनी चालें बदलनी आरम्भ कर दीं।
 
Cutting through Satyaki's shield filled with hundreds of star-signs, he began to change his manoeuvres such as Vind Gat and Pratyagat. 33 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)