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श्लोक 8.10.52  |
न हि पार्था: स पाञ्चाला: स्थातुं शक्तास्तवाग्रत:।
आत्तशस्त्रस्य समरे महेन्द्रस्येव दानवा:॥ ५२॥ |
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| अनुवाद |
| जैसे राक्षस हाथ में वज्र लेकर इन्द्र के सामने नहीं टिक सकते, वैसे ही पांचाल और पाण्डव भी युद्धभूमि में तुम्हारे सामने नहीं टिक सकते।॥52॥ |
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| Just as demons cannot stand before Indra with a thunderbolt in his hand, similarly the Panchalas and Pandavas cannot stand before you in the battlefield.'॥ 52॥ |
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