श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 10: कर्णको सेनापति बनानेके लिये अश्वत्थामाका प्रस्ताव और सेनापतिके पदपर उसका अभिषेक  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  8.10.51 
न ह्यलं त्वद्विसृष्टानां शराणां वै सकेशवा:।
उलूका: सूर्यरश्मीनां ज्वलतामिव दर्शने॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
जैसे उल्लू सूर्य की प्रज्वलित किरणों को नहीं देख पाते, वैसे ही श्रीकृष्ण सहित समस्त पाण्डव आपके द्वारा छोड़े गए बाणों को नहीं देख पा रहे हैं ॥51॥
 
Just as owls are unable to look at the blazing rays of the Sun, similarly all the Pandavas including Shri Krishna are unable to look at the arrows shot by you. ॥ 51॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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