श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 10: कर्णको सेनापति बनानेके लिये अश्वत्थामाका प्रस्ताव और सेनापतिके पदपर उसका अभिषेक  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  8.10.41 
सेनापतिर्भविष्यामि तवाहं नात्र संशय:।
स्थिरो भव महाराज जितान् विद्धि च पाण्डवान्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
महाराज! आप धैर्य रखें। मैं आपका सेनापति बनूँगा, इसमें कोई संदेह नहीं है। अब पाण्डवों को पराजित ही समझिए॥ 41॥
 
Maharaj! You must be patient. I will become your commander, there is no doubt about it. Now consider the Pandavas defeated. ॥ 41॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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