श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 10: कर्णको सेनापति बनानेके लिये अश्वत्थामाका प्रस्ताव और सेनापतिके पदपर उसका अभिषेक  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  8.10.32 
स भवान् धुर्यवत् संख्ये धुरमुद्वोढुमर्हति।
अभिषेचय सैनान्ये स्वयमात्मानमात्मना॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
तुम वीर पुरुष की भाँति युद्धस्थल में सेना का भार वहन करने में समर्थ हो; अतः तुम सेनापति पद पर अभिषिक्त हो जाओ ॥32॥
 
Like a brave man, you are capable of carrying the burden of commanding the army in the battlefield; Therefore, get yourself anointed to the post of commander. 32॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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