श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 10: कर्णको सेनापति बनानेके लिये अश्वत्थामाका प्रस्ताव और सेनापतिके पदपर उसका अभिषेक  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  8.10.31 
भवानेव तु न: शक्तो विजयाय न संशय:।
पूर्वं मध्ये च पश्चाच्च तथैव विहितं हितम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
हम लोगों में से केवल आप ही हमारे शत्रुओं को परास्त करने में समर्थ हैं, इसमें संशय नहीं है। आपने पूर्वकाल, मध्यकाल और अन्तकाल में सदैव हमारा कल्याण किया है॥31॥
 
Among us, only you are capable of defeating our enemies, there is no doubt about this. You have always done good to us in the past, in the middle and in the end.॥ 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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