श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 10: कर्णको सेनापति बनानेके लिये अश्वत्थामाका प्रस्ताव और सेनापतिके पदपर उसका अभिषेक  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  8.10.28 
हते तस्मिन् महेष्वासे शरतल्पगते तथा।
त्वयोक्ते पुरुषव्याघ्र द्रोणो ह्यासीत् पुर:सर:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
पुरुषसिंह! जब महाधनुर्धर भीष्म घायल होकर बाणों की शय्या पर सो गए, तब आपके ही परामर्श से द्रोणाचार्य को हमारी सेना का सेनापति बनाया गया॥ 28॥
 
Purushasingh! After that great archer Bhishma was injured and fell asleep on the bed of arrows, it was on your advice that Dronacharya was made the leader of our army.॥ 28॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas