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mahabharat 8.10.17: वे अत्यंत बलवान, पराक्रमी, अस्त्र-शस्त्रों के ज्ञाता, युद्ध में निपुण तथा सूर्यपुत्र यमराज के समान शत्रुओं के लिए भी असह्य हैं। इसीलिए वे युद्धस्थल में हमारे विरोधियों पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। 17॥   |   mahabharat अध्याय 8.10: कर्णको सेनापति बनानेके लिये अश्वत्थामाका प्रस्ताव और सेनापतिके पदपर उसका अभिषेक   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 10: कर्णको सेनापति बनानेके लिये अश्वत्थामाका प्रस्ताव और सेनापतिके पदपर उसका अभिषेक  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  8.10.17 
एष ह्यतिबल: शूर: कृतास्त्रो युद्धदुर्मद:।
वैवस्वत इवासह्य: शक्तो जेतुं रणे रिपून्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
वे अत्यंत बलवान, पराक्रमी, अस्त्र-शस्त्रों के ज्ञाता, युद्ध में निपुण तथा सूर्यपुत्र यमराज के समान शत्रुओं के लिए भी असह्य हैं। इसीलिए वे युद्धस्थल में हमारे विरोधियों पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। 17॥
 
He is extremely strong, valiant, knowledgeable of weapons, adept at fighting and is unbearable for enemies like Yamraj, the son of the Sun. That is why they can win over our opponents in the battlefield. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)