श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 10: कर्णको सेनापति बनानेके लिये अश्वत्थामाका प्रस्ताव और सेनापतिके पदपर उसका अभिषेक  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  8.10.12-13h 
रागो योगस्तथा दाक्ष्यं नयश्चेत्यर्थसाधका:॥ १२॥
उपाया: पण्डितै: प्रोक्तास्ते तु दैवमुपाश्रिता:।
 
 
अनुवाद
विद्वानों ने अभीष्ट प्राप्ति के लिए चार उपाय बताए हैं- राग (राजा के प्रति सैनिकों की भक्ति), योग (साधन), प्रकुष्टि (उत्साह, बल और कौशल) और नीति (नीति); परंतु ये सभी भगवान पर निर्भर हैं॥ 12 1/2॥
 
‘The learned have suggested four methods to achieve the desired goal- Raag (devotion of soldiers towards the king), Yoga (resources), Prakushti (enthusiasm, strength and skill) and Niti (ethics); but all of them are dependent on God.॥ 12 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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